ग्वालियर के कंपू थाना क्षेत्र में करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे CM राइज स्कूल (सांदीपनि विद्यालय) की निर्माणाधीन बिल्डिंग की छत सोमवार को अचानक भरभराकर गिर गई।
हादसा शासकीय पद्माराजे कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में हुआ, जहां नई बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर स्लैब की कास्टिंग का काम चल रहा था। छत गिरने से वहां काम कर रहे चार मजदूर घायल हो गए।
उन्हें तत्काल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। हादसे में निर्माणाधीन बिल्डिंग के पिलर भी क्षतिग्रस्त हो गए।
घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, शटरिंग की मजबूती और कार्यस्थल पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना मिलने पर प्रशासन, पुलिस और एसडीईआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों से जानकारी जुटाई।
स्लैब कास्टिंग के दौरान ढहा छत का हिस्सा, पिलर भी टूटे
शासकीय पद्माराजे कन्या विद्यालय परिसर में पुलिस हाउसिंग बोर्ड कॉरपोरेशन द्वारा नई बिल्डिंग का निर्माण कराया जा रहा है। परियोजना की लागत करीब 39 से 40 करोड़ रुपए बताई गई है। निर्माण कार्य का ठेका गुलशन राय के पास है। बिल्डिंग के एक हिस्से का काम पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे हिस्से में निर्माण जारी है।
सोमवार को दूसरी मंजिल पर छत डालने के लिए स्लैब की कास्टिंग की जा रही थी। इसी दौरान अचानक शटरिंग का ढांचा बैठ गया और छत का हिस्सा नीचे आ गिरा। हादसे के समय वहां मजदूर काम कर रहे थे। छत गिरने से निर्माणाधीन ढांचे के पिलर भी क्षतिग्रस्त हो गए। मलबे और निर्माण सामग्री के बीच फंसे मजदूरों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।
पंप के प्रेशर से छत बैठने का दावा
निर्माण स्थल पर मौजूद सुपरवाइजर बलवंत सिंह ने हादसे की वजह बताते हुए कहा कि कंक्रीट डालने के लिए पंप का इस्तेमाल किया जा रहा था। उनके मुताबिक, पंप के प्रेशर के कारण एक जगह कंक्रीट की सामग्री अधिक मात्रा में इकट्ठा हो गई, जिससे छत बैठ गई।
सुपरवाइजर ने निर्माण सामग्री में कमी होने से इनकार किया। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह का पता तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा। शटरिंग की क्षमता, कंक्रीट डालने की प्रक्रिया, निर्माण के दौरान अपनाए गए सुरक्षा मानकों और ढांचे की मजबूती की जांच महत्वपूर्ण होगी।
प्रोजेक्ट इंजीनियर बोले- दोषी मिला तो कार्रवाई होगी
पुलिस हाउसिंग बोर्ड कॉरपोरेशन के प्रोजेक्ट इंजीनियर मनोज कुमार आचार्य ने बताया कि उन्हें स्लैब की कास्टिंग के दौरान शटरिंग का ढांचा ढहने की सूचना मिली है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में ठेकेदार या विभागीय स्टाफ की लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आचार्य के मुताबिक, क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा ठीक कराकर रिकास्ट किया जाएगा और गुणवत्ता के मानकों के अनुसार निर्माण कार्य पूरा कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि परियोजना का एक ब्लॉक पूरा हो चुका है, जबकि दूसरे हिस्से में काम चल रहा है।
तहसीलदार बोले- चार घायल मजदूरों को अस्पताल भेजा
तहसीलदार मनीष जैन ने बताया कि CM राइज स्कूल के निर्माणाधीन भवन में दूसरी मंजिल की छत डालने के दौरान हादसा हुआ। इसमें चार मजदूर घायल हुए हैं। सभी को उपचार के लिए ट्रॉमा सेंटर भेजा गया है।
घायलों की पहचान हरिराम (38), निवासी बंसल सागर, दमोह; राजेश (32), निवासी मड़ियादो; दिलेश्वर (25) और झरोखा (38), निवासी छत्तीसगढ़ के रूप में बताई गई है। सभी निर्माण कार्य में लगे हुए थे। घायलों की स्थिति और चोटों की गंभीरता के संबंध में विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी सामने आना बाकी है।
मजदूर बोले- लंच के समय हुआ हादसा
घटनास्थल पर मौजूद मजदूर अनिल राय ने बताया कि हादसे के समय छत पर रोड़ी और अन्य निर्माण सामग्री डाली जा रही थी। उन्होंने कहा कि लंच का समय होने के कारण कुछ मजदूर खाना खाने गए थे। इसी दौरान अचानक तेज आवाज आई। आवाज सुनकर वे मौके पर पहुंचे, तो छत गिरी हुई थी।
अनिल राय के मुताबिक, निर्माण स्थल पर करीब 200 से 250 मजदूर काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि हादसे में चार मजदूर घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, छत किस वजह से गिरी, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
एसडीईआरएफ ने भी मौके का लिया जायजा
घटना की सूचना मिलने पर एसडीईआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंची। टीम के सदस्य गोविंद शर्मा ने बताया कि उन्हें निर्माणाधीन भवन में लोगों के फंसे होने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने कुछ मजदूरों के फंसे होने की जानकारी दी। इसके बाद घायलों को अस्पताल भेजे जाने की जानकारी मिली।
अब जांच में तय होगी जिम्मेदारी
करीब 40 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे शैक्षणिक भवन में निर्माण के दौरान हुए इस हादसे ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि हादसा शटरिंग की तकनीकी खामी, कंक्रीट के असमान भार, निर्माण प्रक्रिया में चूक या किसी अन्य कारण से हुआ।