भोपाल मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट पर आईं आपत्तियों पर 16 नवंबर से सुनवाई शुरू होगी। करीब 13 हजार आपत्तियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरीकों से सुना जाएगा। गुरुवार को सांसद आलोक शर्मा समेत विधायक व अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में सुनवाई के संबंध में चर्चा की गई।

25 अक्टूबर तक आपत्तियां ली गई थीं। इस दौरान 16 हजार से ज्यादा आपत्तियां मिली। हालांकि, करीब 3 हजार आपत्तियां ऐसी थीं, जो एक से अधिक बार दी गई थी। यानी, किसी एक व्यक्ति ने ऑनलाइन आपत्ति भी दर्ज करा दी और ऑफलाइन भी दस्तावेज दे दिए। इसके चलते इन्हें हटा दिया गया। आपत्तियों की संख्या अब करीब 13 हजार हो गई हैं। इन्हीं की सुनवाई 16 नवंबर से होगी।

कलेक्टोरेट में हुई बैठक
मास्टर प्लान 2047 का ड्राफ्ट जारी होने के बाद नगर एवं ग्राम निवेश को जनता से प्राप्त हुईं आपत्तियां, दावे और सुझावों पर चर्चा के लिए कलेक्टोरेट में बैठक हुई। इसमें आपत्तियों पर सुनवाई 16 नवंबर से करने का निर्णय लिया। अब विभागीय अधिकारी पूरा शेड्यूल बना रहे हैं। ताकि, साफ हो सके कि कब-कहां की आपत्तियों की सुनवाई की जाएगी।

बैठक में सासंद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर मालती राय, एडीएम प्रकाश नायक, संयुक्त संचालक नगर एवं ग्राम निवेश आनंद मोहन लिखार सहित ग्रामीण अंचलों से आए सरपंच एवं अधिकारी मौजूद थे।

BIZ-1 और BIZ-2 जोन हटाने की मांग
किसान चाहते हैं कि उनकी कृषि भूमि का उपयोग खेती के लिए ही सुरक्षित रखा जाए। अनोखी सिंह पटेल के मुताबिक, किसानों के पास आजीविका का प्रमुख साधन खेती है। इसलिए उन्होंने भोजताल संरक्षण जोन-1 (BIZ-1) और जोन-2 (BIZ-2) को हटाने और कृषि भूमि का लैंडयूज कृषि ही रखने की मांग की है। इसे लेकर उन्होंने आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं।


किसान भविष्य को लेकर चिंतित
किसानों का आरोप है कि मौजूदा ड्राफ्ट में बड़ा तालाब के आसपास की कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव का प्रस्ताव किया गया है। इसी वजह से किसान अपनी जमीन के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।


भोपाल मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट के विरोध में शुक्रवार को बड़ी संख्या में किसान शाहपुरा स्थित टीएनसीपी दफ्तर पहुंचे। भारतीय किसान संघ के बैनर तले पहुंचे किसानों ने उपसंचालक हरिओम महेश्वरी को आपत्तियां सौंपीं।

भोपाल विकास योजना-2047 के नए ड्राफ्ट को लेकर किसानों और स्थानीय रहवासियों ने विरोध जताते हुए आपत्तियां उठाईं। मुगालिया छाप के किसान कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल किए जाने के विरोध में पैदल मार्च कर भोपाल पहुंचे।