क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने जिलाध्यक्षों से पूछा कि प्रभारी मंत्री नियमित दौरे पर आते हैं या नहीं। जवाब मिला कि मंत्री बहुत कम आते हैं। कभी आते भी हैं तो भाजपा कार्यालय नहीं पहुंचते। कार्यकर्ता उनसे मिलना चाहते हैं, लेकिन उनके पास समय नहीं रहता।
इस पर टंकराम वर्मा ने जिलों में चल रहे विकास कार्यों का ब्योरा देना शुरू किया। जवाब देते समय वे बार-बार विधायक अजय चंद्राकर की ओर देख रहे थे। इसे भांपते हुए जामवाल ने कहा, ‘मंत्री आप हैं या विधायक जी? यदि ऐसा ही चलता रहा तो आपका प्रभार बदलना पड़ेगा।’ इस पर बैठक में ठहाके लगे। बताया जा रहा है कि टंकराम को संगठन की ओर से पहले भी चेतावनी मिल चुकी है।
गजेंद्र और श्याम बिहारी के कामकाज की सराहना: दो दिवसीय बैठक में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को लेकर कोई शिकायत सामने नहीं आई। गजेंद्र यादव के पास राजनांदगांव जिले का प्रभार है।
बैठक में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह मौजूद नहीं थे। जिले के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रभारी मंत्री नियमित दौरे करते हैं और विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट भी मिल रहा है। श्याम बिहारी जायसवाल के पास बलौदाबाजार और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले का प्रभार है।
दोनों जिलों की छह विधानसभा सीटों में से केवल दो भाजपा के पास हैं। इसके बावजूद पदाधिकारियों ने मंत्री के नियमित दौरों की प्रशंसा की। दोनों जिलों में डीएमएफ की बैठकें भी नियमित हो रही हैं।
हारी हुई 36 सीटों पर ज्यादा फोकस
बैठक में भाजपा की हारी हुई 36 विधानसभा सीटों को लेकर सबसे अधिक चर्चा हुई। इन क्षेत्रों के प्रभारी मंत्रियों को सक्रियता बढ़ाने की हिदायत दी गई। उन्हें नियमित दौरे कर कार्यकर्ताओं से संवाद करने और आगामी कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है।
निगम-मंडलों के अध्यक्षों को भी एक-एक विधानसभा सीट की जिम्मेदारी दी गई है। संगठन उनसे नियमित रिपोर्ट ले रहा है। प्रभारी मंत्रियों से भी इन सीटों के लिए आगे की रणनीति मांगी गई है।
योजनाओं और कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल
संगठन ने मंत्रियों से पूछा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ जिले के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं। कुछ जिलाध्यक्षों ने कहा कि योजनाओं से जुड़े छोटे-छोटे काम भी अटक रहे हैं। कुछ ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें कीं।
गृह मंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने बस्तर में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद क्षेत्र के विकास के लिए सरकार ने क्या कार्ययोजना बनाई है और किस तरह काम किया जा रहा है।