ये खुद को मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक के संस्थानों या विश्वविद्यालयों से संबद्ध बताते हैं। फिजियोथेरेपिस्ट की बढ़ती मांग के साथ ऐसे संस्थानों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। प्रदेश में अभी केवल एक सरकारी फिजियोथेरेपी कॉलेज है और छह नए कॉलेज प्रस्तावित हैं।
प्रस्तावित नए कॉलेज में दाखिला देने की तैयारी जारी है। इसके बावजूद 100 से अधिक संस्थान फिजियोथेरेपी कोर्स कराने का दावा कर रहे हैं। कुछ सेंटर 4 से 5 लाख रुपए में बिना नियमित पढ़ाई के डिग्री दिलाने की बात कह रहे हैं।
पड़ताल के दौरान राजधानी के एक फिजियोथेरेपिस्ट ने एक छात्र का वीडियो उपलब्ध कराया। छात्र छत्तीसगढ़ में रहते हुए मध्यप्रदेश की एक यूनिवर्सिटी से बीपीटी (बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी) का कोर्स कर रहा है। उसने वीडियो में बताया कि वह सालाना 75 हजार रुपए फीस देता है, लेकिन नियमित कॉलेज नहीं जाता।