तुर्की में शरिया कानून लागू करने की मांग, खलीफा एर्दोगन का विरोध, इस्लामिक नेता पत्नी समेत अरेस्ट
Updated on
26-08-2026 01:17 PM
अंकारा: तुर्की में इस्लामिक विद्वान और शरिया लागू करने के समर्थक अल्पर्सलान कुयतुल को गिरफ्तार कर लिया गया है। कुयतुल के साथ उनकी पत्नी सेमरा कुयतुल, वकील बिलाल इपेक और फुरकान आंदोलन के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। कुयतुल की गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब उन्होंने हाल ही ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान रेचेप तैयप एर्दोगन की नीतियों की कड़ी आलोचना की थी। उन पर संगठित अपराध, धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
कुयतुल समेत 56 लोग अरेस्ट
तुर्की की स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अडाना में शुरू हुई अल्पर्सलान कुयतुल क्रिमिनल ऑर्गनाइजेशन की जांच के तहत 6 प्रांतों में अभियान चलाया गया। इसके तहत कुयतुल और उनकी पत्नी समेत 56 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। अडाना की प्रांतीय पुलिस और संगठित अपराध शाखा की टीमों ने 19 अगस्त को इस ऑपरेशन की शुरुआत की। इसमें पहले 32 संदिग्ध पकड़े गए और बाद में 24 और संदिग्धों को हिरासत में लिया गया।
कुयुतुल और उनके सहयोगियों पर आपराधिक संगठन बनाने, उसे चलाने और उसका सदस्य होने के साथ ही टैक्स कानून का उल्लंघन करने जैसे आरोप लगाए गए। अल्पर्सलान कुयतुल और उनकी पत्नी समेत 56 संदिग्धों को जरूरी कार्रवाई के बाद कोर्ट में भेजा गया।
ईरान नीति पर एर्दोगन का किया विरोध
कुयतुल ने ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन की आलोचना करके सभी का ध्यान खींचा था। कुयतुल ने तुर्की की सरकार के अमेरिका और इजरायल के हमलों के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाने और ईरान व रेजिस्टेंस फ्रंट का साथ देने की अपील की थी। उन्होंने जोर देकर कहा था कि ईरान और दूसरी तरफ अमेरिका-इजरायल के बीच टकराव की स्थिति में तुर्की को निष्क्रिय या दोहरी नीति नहीं अपनानी चाहिए।
फुरकान मूवमेंट के वकीलों ने इन गिरफ्तारियों का विरोध किया है। उनका कहना है कि हालिया ऑपरेशन आपराधिक संगठन गतिविधियों के आरोप में किया गया है। इस समूह पर पहले भी ऐसे आरोप लग चुके हैं। फुरकान मूवमेंट की वकील अलीशान इंची ने इस ऑपरेशन को पुराने मामलों का नया संस्करण बताया और इसे उसी शो का तीसरा एक्ट करार दिया।
कौन हैं अल्पर्सलान कुयतुल?
कुयतुल तुर्की में शरिया आधारित शासन लागू करने और मुसलमानों की राजनीतिक एकता के बड़े समर्थक रहे हैं। कुयतुल ने 1993 से 1997 के बीच मिस्र की अल-अजहर यूनिवर्सिटी से शरिया की पढ़ाई की है। इसी दौरान अदाना में फुरकान फाउंडेशन की स्थापना की। फुरकान मूवेंट का मकसद कुरान और सुन्नत पर आधारित एक इस्लामिक सभ्यता का निर्माण करना है। कुयुतल अपने धार्मिक उपदेशों में कहते रहे हैं कि इस्लाम का दायरा सिर्फ व्यक्तिगत पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे राजनीतिक और सामाजिक जीवन को भी आकार देना चाहिए।
कुयतुल कहते रहे हैं कि तुर्क, कुर्द और अरब लोगों को अलग-अलग राज्यों में बंटने के बजाय अपने साझा विश्वास इस्लाम के आधार पर एकजुट होना चाहिए। वे मुस्लिम उम्मा को जातीय और राष्ट्रीय पहचान से ऊपर रखने के समर्थक हैं। कुयतुल ने सार्वजनिक रूप से खुद को सुन्नी और हनफी बताया है। इसका मतलब है कि वे सुन्नी इस्लाम के चार प्रमुख स्कूलों में से एक हनफी से जुड़े हैं।
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